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Entries from March 2006

Florence: Firenze:फ़िरेन्ज़े

March 26, 2006 · No Comments


एक बार फ़िर से फ़िरेन्ज़े (फ़्लोरेन्स) भी देख लिया!
सभी यात्राओं का विवरण लिखा जा रहा है, आपके लिये!
आगे की यात्राओं की योजना भी बन रही है!
आप भी देखिये मेरे फ़्लिकर पर, अभी केवल १० (>१५० मे से).

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नई किताब का आनन्द !

March 20, 2006 · No Comments

आज (१७ मार्च) मुझे नई किताब मिली इटालियन सीखने के लिये, बिल्कुल वही आनन्द आया जो बहुत् सालों पहले छठी या सातवी क्लास की नयी किताबों के आने पर आता था। वैसे हमारे समय मे किताबो में रन्गीन चित्र नही होते थे, मुझे याद है हमारी दूसरी, (१९८२-१९८३) तीसरी कक्षा की किताबो मे मुख्यत: रेखाचित्र ही दिखायी देते थे और हम उनको देखकर ही बहुत सी कल्पनायें कर लेते थे, बाद (१९९०-१९९५) मे देखा कि मेरे मामा के बच्चों की किताबें तो रन्गीन चित्रो से भरी रहती है। हां तो इतने वर्णन का आशय मात्र ये कि मेरी किताब (पुस्तक) भी बहुत रंगीन है।
हांलाकि मुझे ज्यादा समझ नहीं आता फ़िर भी चून्कि कहते है न कि एक तस्वीर सौ वाक्यों के समान होती है इसलिये चित्र देख्कर काफ़ी कुछ समझने का प्रयास करता रहता हू। और हमारी अध्यापिका महोदया भी अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करती हैं, जैसे कि हम लोग बहुत इटालिअन अब तक सीख चुके हैं इसलिये वे सारे आदेश भी इटालियन मे ही देती हैं।
हमारी कक्षा मे फ़्रेन्च, रोमानियन, कैमेरूनी, बरमा और पुर्तगाल तथा स्पेन से भी लोग है, पहले मुझे लगता था कि कुछ छात्र बहुत अच्छा कैसे जल्दी से सीख रहे है तो पता चला कि स्पेनिश, इटालियन से काफ़ी मिलती है।
मै तो यहा पिछले एक साल से हूं इस बीच जून २००५ मे लगभग १०-१२ दिन मै भी पहली बार इटालियन सीखने के प्रयास मे एक और कक्षा मे शामिल हुआ था, उसमे शुरुआत तो अच्छी हुई थी पर वो इस तरह की सप्ताह मे २ दिन २-२ घन्टे का न होकर प्रतिदि ५ घन्टे की थी और मै प्रतिदिन एक घन्टा ही निकाल पाता था इसलिये मैने जल्दी ही क्लास छोड दी थी, उसके बाद भारत लौटा था और दुबारा जाने पर कुछ खास जरूरत महसूस नही हुई तो सीखने का भूत भी उतर गया। अभी फ़िर से इसलिये चढा कि कुछ नये PhD छात्र आये है और उनके लिये विशेष रूप से ये कक्षायें आयोजित हो रही है तो मेरा भी मन ललचाया और मैने मालूम किया तो मुझे अनुमति भी मिल गयी।
और यही नही, हर हफ़्ते इटालियन समाज और सन्स्क्रिति को समझने और जानने के लिये आयोजित यात्राओं मे भी सम्मिलित होने की। और कुल मिलाकर मुझे मौका मिल रहा है द्रिश्यो को कैमरे मे कैद करने का वो न सबसे बडी बात है, एक और बात; मित्र भी बनाने का चाहे वो इटालियन प्रैक्टिस करने के लिये ही क्यो न हों।

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पेरुज़ा: इटली

March 19, 2006 · No Comments

पेरुज़ा :प्राचीन शहर की नवीन यात्रा। Posted by Picasa

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असीसी: इटली

March 19, 2006 · No Comments

Posted by Picasa एक खूबसूरत शहर की यादगार यात्रा।

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भारत से सजीव समाचार: दूरदर्शन द्वारा अन्तर्जाल पर प्रसारण

March 16, 2006 · No Comments

देखिये ‘डी डी न्यूज लाइव स्ट्रीमिंग’!
तो देर किस बात की ‘प्ले’ बटन पर चटका मारिये और देखिये भारत से ताजा समाचार, यही नहीं आप देख सकते हैं विशेष मनोरंजक और ग्यानवर्धक कार्यक्रम भी शनिवार और रविवार को।
अगर आप ‘प्ले‘ नहीं देख पा रहे हैं तो शायद आपके पास
रियल प्लयेर नही है; तो यहां से अभी डाउनलोड कर लीजिये।

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होली है: एक और स्लाइड शो: ‘२०’ चुनिन्दा तस्वीरें

March 14, 2006 · No Comments

यहां देखिये कैसे खेली जा रही है होली, भारत मे और भारत के बाहर भी!

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रोम की तीसरी यात्रा अभी केवल चित्र, विवरण जल्दी ही…

March 14, 2006 · No Comments

मित्रों इस रविवार को मैं रोम में था, अन्तर्राष्ट्रीय विद्यार्थियों के समूह के साथ, जो यहां की भाषा सीखने और अध्ययन करने आये हैं, तो प्रत्येक सप्ताहान्त एक यात्रा आयोजित की जा रही है, सौभाग्य से मुझे भी मौका मिल रहा है, यद्यपि मै इसके लिये qualified (क्रिपया हिन्दी शब्द सुझायें) नही हूं ।
इस स्लाइड शो पर क्लिक करने पर आप slide.com पर पहुंचेगें, अच्छा होगा आप सारे चित्र यहां देखें और अपनी राय दें।

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आडिओ ब्लागर से मेरा आडिओब्लाग (पोड्कास्ट)|

March 10, 2006 · No Comments

सभी ब्लागर बन्धुओँ को मेरा सादर नमस्कार….
……………..पहली पोड्कास्ट के ………………………..
…………………………….तक के लिये पुनः नमस्कार

this is an audio post - click to play

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डरना मना है

March 8, 2006 · No Comments

वैसे तो मना है, लेकिन आगे आपकी मर्जी ।

“हां, तो ये एक प्रकार का साफ़ स्वच्छ…
अगर आप ध्यान से देखेंगे तो इस कार के विग्यापन में जब कार तीसरा मोड मुडती है, आपको दाहिने कोने से एक धुन्धली सी मानवाक्रित उभरती सी लगेगी, मुझे नही लगता ये जानबूझकर किया गया होगा लेकिन हो सकता है सम्पादन के दौरान कुछ…”

अब आप Volume बहुत मत बढाइये, प्ले बटन दबाइये और कुछ बताइये,

अगर नहीं बताना चाहते तो देखिये और लोगों ने क्या बताया यहां पर।

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अमोनिया विलयन: स्प्रिट मे

March 8, 2006 · No Comments


अमोनिया: इसका उपयोग उर्वरक एवं पोलीमर्स के अतिरिक्त विस्फ़ोटक बनाने में भी होता है! पर एक रसायनग्य होने के नाते मैं इसका उपयोग मुख्यत: अभिकारक के रूप मे ही करता हूं, जिसके लिये इसको किसी विलायक में घोलना पडता है, पर जब आवश्यकता होती है शुद्ध अमोनिया की, तब इसको ठोस अवस्था मे भी प्राप्त करता हूं, इसका क्वथनान्क -३४ सेल्सियस और गलनान्क -७५ सेल्सियस होता है।

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