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Entries from February 2007

14 फरवरी की सुबह..

February 15, 2007 · No Comments

साधारणतः मै ८ बजे के आस-पास उठता हूँ, आप कुछ भी सोचें मेरे लिये ये बहुत ही आवश्यक है, पता नही क्या हुआ कि आज सुबह जल्दी ही आंख खुल गयी (वैलेन्टाएन डे का असर?), मेरा टी वी प्रतिदिन बिना रुके सुबह ७ बजे शुरू हो जाता है और ९ बजे बन्द हो जाता है, अब तक टी वी बन्द ही था, अभी एक मिनट भी न बीता होगा कि मोबाइल फोन बजा। मै मन ही मन बहुत प्रसन्न हो गया, अवश्य ही भारत से किसी कन्या का फोन होगा, क्योकि स्क्रीन पर No Number आ रहा था।

वैसे तो मैने बता रखा है कि मै देर से उठता हूँ फ़िर भी.. मैने फोन उठाया खिडकी के पास जाकर खिड़की खोल ली. वलेन्टाएन दिवस के इटालियन रिवाज के मुताबिक (विवरण पिछली पोस्ट मे देखें)। मैने बडे़ प्यार से हेलो बोला, कुछ और कहने वाला ही था कि उधर से जो आवाज आयी उसने तो मेरे सुबह-सवेरे के दिवा-स्वप्नों पर कुठाराघात ही कर दिया।

उधर अपने सिद्दीकी मियां थे, बोले हमको गोस्वामी जी का नम्बर चाहिये, अब मुझे याद तो रहता नहीं इसलिये कुछ और सोच पाता इससे पहले ही बोल पडे़ अच्छा अभी SMS कर दीजिये, जब तक मै उनको ये बता पाता कि No Number पर SMS भेजना मरे लिये असम्भव कार्य है तब तक..कुछ तकनीकी समस्याओं के चलते हमारा सम्पर्क भंग हो गया था।

मैं पहले तो थोडा़ घबराया कि अब क्या करें, तब तक मेरा ‘जड़ फोन’ (land line) बज उठा उन्होने फ़िर से कहा कि SMS कर दीजिये मैने उन्को बताया कि ये फ़िक्स फ़ोन है और मोबाइल पर भी नम्बर नही आया था तो वे जरा और हड़्बड़ाये फ़िर सकपकाये और आखिर मे बोले.. फ़िर….मैने कहा.. ई-मेल से भेज दूंगा, बोले हाँ.. हाँ.. जरूर… अभी… तुरन्त…. जल्दी से भेज दीजिये और फोन कट कर दिया।

मेरे मन मे अजीब अजीब से खयाल आने लगे मैने तुरत गोस्वामी जी को फोन लगा दिया और ये बाद मे गणना की कि वहाँ (NY, USA) अभी क्या समय होगा। मैने उनको घटना से अवगत कराया और व्यवधान उत्पन्न करने के लिये क्षमा मांगना भी भूल गया। उन्होने अपना नया-नया लिया मोबाइल नम्बर मुझे लिखवा दिया, और मैने चारों नम्बर उनको समय क्षेत्र के अन्तर को बताते हुए भेज दिये, साथ मे ये भी पूछ लिया कि कुछ खास या अर्जेन्ट हो तो हमें भी अवगत करायें। और फ़िर से निद्राग्रस्त हो लिये।

बाद में उनका ई मेल मिला कि धन्यवाद, हम आपसे जी मेल पर विस्तार से बात करेंगे बाकी सब ठीक है।

तो ऐसी हुई सुबह..मै विश्वविद्यालय पहुंचा कुछ भी अलग/नया नही लग रहा था, कल रात सुना था आज का दिन भारत मे बहुत Eventful होने वाला है।

चूकि दिल तो अपना भी हिन्दुस्तानी ही है सो हमने भी उम्मीद नही छोड़ी और दोपहर बाद जब मेरे भाग्य जगे तब कहीं जाके SMS आया।

“If I were a bird, I would be standing at ur window guarding ur eyes from the sunlight with my wings, waiting for you to wake up…Just to say…………….”

और……..राहत मिली किसी को तो मेरी नींद का खयाल है। वैसे… इस बार नम्बर तो आया था, पर किसका था मै अभी तक अनुमान ही लगा रहा हूँ :) .

ये सब तो हुआ ही पर हम बेसब्री से का इन्तज़ार करते रहे तनवीर मियां का भी पर शायद वे अपने वैलेन्टाइन के साथ व्यस्त हो गये थे सो दिखायी भी न पड़े।

रात को जब गोस्वामी जी से मालूम करने की कोशिश की तो वो भी मौज लेते हुए ही लगे और उल्टा मुझ पर ही……

अब….हमने स्वयं को समझाया, अपने को महान बताया और बहुत दिनों बाद ये गीत गुन-गुनाया…

किये जा तू जग मे भलाई का काम।
तेरे दुःख दूर करेंगे राम॥

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सन्त वैलेंटाइन दिवस-सामान्य ज्ञान~Sain’t Valentine’s Day

February 13, 2007 · No Comments

इटली के कैलेन्डर मे वर्ष का प्रत्येक दिन किसी सन्त के नाम से जुडा़ हुआ है। जैसे १३ फरवरी Sain’t Maura martire और १५ फरवरी Sain’ts  Faustino & Giovita mm. के नाम से। सबका अपना महत्त्व है। हर इटालियन के दो नाम होते हैं, एक तो जो दिया जाता है, और दूसरा उस दिन के सन्त का।

आज १४ फरवरी है, आज Dottssa. Sara Taffi  का जन्म दिवस है, इसलिये सबसे पहले उनको जन्म दिन की बहुत सारी शुभकामनायें (Buon compleanno a Sara), साथ ही डा. ललित गोस्वामी को भी जो कि वर्ष २००० से २००४ तक इसी दिन अपना जन्म दिन मनाते आये हैं। इसी सन्दर्भ मे एक बात और, हमारी प्रयोगशाला  मे Signorina (सुश्री) Valentina Stramenga भी हैं, जिन्होने इसी सोमवार को हुई अपनी मास्टर्स की अन्तिम परीक्षा बहुत अच्छे अन्कों के साथ उत्तीर्ण की है, उनको भी बहुत बहुत बधाइयाँ(Molte congratulazioni a Valentina )।

वेलेंटाइन दिवस मनाने की परंपरा हमारे देश में भले ही कुछ सालों से हो लेकिन संसार के कुछ हिस्सों में प्रेमी यह पर्व एक लंबे अरसे से मनाते रहे हैं (ऐसा कहा जाता है)। इस प्रेम-पर्व को मनाने के तौर-तरीके और रीति-रिवाज बड़े अनोखे व रोचक रहे हैं।

प्यार के इजहार का प्रतीक माना जाने वाला यह दिन एक ऐसे संत के बलिदान का दिन है जिसने प्यार किया और प्यार करने वालों को बंधन में बांधने का प्रयास किया। ऐसा कहा जाता है कि रोम के शासक क्लोडियस द्वितीय ने अपने शासनकाल में अपने सिपाहियों पर अपनी प्रेमिकाओं से मिलने व शादी करने पर रोक लगा दी थी।

 
तब इस प्रेम पुजारी वेलेंटाइन ने लोगों की छुपकर शादियां करवाई और प्रेम करने वालों को मिलाया। इसी वजह से क्लोडियस ने वेलेंटाइन को 14 फरवरी 269 ई. को मृत्युदण्ड दे दिया। वेलेंटाइन ने मृत्यु से पहले अपनी दोस्त जो कि जेलर की बेटी थी के नाम एक खत लिखा जिसमें उसने लिखा-फ्रॉम योर वेलेंटाइन। इसी दिन को प्यार के प्रतीक के दिन में संत वेलेंटाइन के नाम पर वेलेंटाइन दिवस के नाम से विश्व में मनाया जाने लगा।

 
अलग-अलग रीति-रिवाज:

1. 1700 ई. में वेलेंटाइन डे के दिन अंग्रेज अविवाहित युवतियां कागज के टुकड़ों पर कुंवारे लड़कों का नाम लिखती थीं और फिर उसे कीचड़ में लपेट कर बाल्टी में रखे पानी में डालती थी या पानी में बहा देती थीं। जो नाम सबसे पहले पानी में तैरकर ऊपर आ जाता था, वही उस युवती का सच्चा प्रेमी माना जाता था।

2. 18वीं शताब्दी की शुरुआत में कुछ मित्रों ने एक समूह बनाया था और फिर अपने वेलेंटाइन का नाम अपनी बांह पर लिखवाकर कई हफ्तों तक ऐसे ही रखा था। इन दोस्तों की इस अनोखे रिवाज के कारण इस दिन इस कहावत का चलन शुरू हुआ-अपनी बांह पर अपना दिल रखना।

3. कई वर्षो पूर्व ऐसी मान्यता थी कि अगर वेलेंटाइन डे पर कोई युवती रॉबिन पक्षी को उड़ते देख ले तो उसकी शादी किसी नाविक से होती है। अगर उसे गोल्डफिंच उड़ती दिखती है तो उसकी शादी अमीर व्यक्ति से होती है और गौरेया दिखे तो गरीब व्यक्ति से शादी होती है।

4.एक अनोखा रिवाज और भी रहा है, जिसमें युवतियां वेलेंटाइन डे से एक दिन पहले रात में अपने तकिये के चारों कोनों व बीच में तेजपत्ता पिन से टांक कर सोती थीं। उनका विश्वास था कि ऐसा करने से उन्हें अपने भावी पति के दर्शन सपने में हो जाएंगे।

5. इंग्लैंड में इस दिन लोग उपहार स्वरूप एक-दूसरे को फल और कैंडी देते हैं। विशेष रूप से किशमिश, अजवाइन व बेर वाला केक बनाया जाता है। बच्चे मिलकर वेलेंटाइन डे का गीत गाते हैं।

6. जर्मनी में वेलेंटाइन डे पर युवतियां गमले में प्याज बोती हैं व प्रत्येक को किसी पुरुष का नाम देकर फायरप्लेस के पास रख देती हैं, जो सबसे पहले अंकुरित होता है वही उस महिला का सच्चा प्रेमी होता है।

7. यहाँ इटली में इस दिन अविवाहित युवतियां खिड़की पर बैठकर अपने भावी जीवन साथी का इंतजार करती हैं। जिस लड़के पर उनकी नजर सबसे पहले पड़ती हैं उससे वे एक साल के भीतर शादी भी कर लेती हैं (ये भी कहा जाता है)। इस अनोखे रिवाज का जिक्र शेक्सपियर की हेमलेट पुस्तक में भी हुआ था।

8. अमेरिका में लोग अपने दोस्तों को वेलेंटाइन कार्ड, चॉकलेट्स व गिफ्ट्स भेजते हैं। इस दिन हर साल तकरीबन चॉकलेट के करोड़ों डिब्बे बिकते हैं। कुछ स्कूलों में इस दिन समारोह भी आयोजित किए जाते हैं क्योंकि ऐसा मानना है कि संत वेलेंटाइन बच्चों से बहुत प्यार करते थे।

9. डेनमार्क में इस प्रेम पर्व के दिन युवक अपनी प्रियतमा को एक विशेष वेलेंटाइन कार्ड भेजता है, जिसे जोकिंग लेटर भी कहा जाता हैं। इस कार्ड में कोई कविता भी जरूर लिखी होती हैं लेकिन भेजने वाला प्रेमी अपना नाम नहीं लिखकर उसकी जगह उतनी ही संख्या में बिंदु लगा देता हैं। अगर लड़की नाम सही पहचान लेती है तो लड़का ईस्टर पर उसे ईस्टर एग उपहार में देता है। वहां वेलेंटाइन डे पर सभी दोस्तों को सफेद रंग के दबे हुए फूल भेजने का भी रिवाज है।

10. वेल्स में लकड़ी के चम्मचों पर नक्काशी की जाती है और इन्हें ही उपहार में अपने प्रेमी या प्रेमिका को दिया जाता है।

11. स्कॉटलैंड में रिबन या कागज से बनी लवर्स नॉट पारंपरिक उपहार है।
प्रेम के प्रतीक सदियों से प्रेम प्रतीकों के माध्यम से प्यार का इजहार किया जाता रहा है तथा वेलेंटाइन डे पर तो प्रेम प्रतीकों का महत्व ही कुछ और होता है।

 

कुछ खास प्रेम प्रतीक:-

हृदय: 

 दिल सबसे ज्यादा प्रसिद्ध और लोकप्रिय प्रतीक है क्योंकि कामदेव के तीर से बिधा दिल प्रेम की अभिव्यक्ति का सबसे प्यारा जरिया है। इसलिए दिल बने हुए का‌र्ड्स, कुशन कवर, पिलो, शो पीस आदि का खूब चलन है।

 
गुलाब:

 हर फूल में कुछ न कुछ भाव होता है। इसमें गुलाब का अपना विशेष स्थान है। फूलों का राजा गुलाब भावनाओं का इजहार करता हैं। वेलेंटाइन डे पर यह मित्रता, प्रेम और मेल-मिलाप का प्रतीक बनता है।

लव बर्ड (प्यार का पंछी):

ऐसा माना जाता है कि वेलेंटाइन डे पर ही लव बर्ड को उनका साथी मिला था इसलिए प्रेमी एक-दूसरे को उपहार स्वरूप लव बर्ड भी देते हैं।

साभार जागरण प्रकाशन समूह।

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संस्कृत विरोधी भाषण पर…

February 10, 2007 · No Comments

संपूर्णानंद विवि में राज्यपाल के अंग्रेजी प्रेम पर भड़के छात्र।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का २७ वाँ दीक्षांत समारोह।

राज्यपाल के कथन “चांद पर जाना है तो अंग्रेजी पढ़ें, संस्कृत तो बैलगाड़ी के जमाने की भाषा है। इससे जीवन में तरक्की नहीं पायी जा सकती है

 पर छात्र भड़क उठे। नारेबाजी शुरू हुई तो आनन-फानन में महामहिम को पंडाल से निकाला जाने लगा। इस पर उत्तेजित लोगों उनकी तरफ न केवल जूते-चप्पल बल्कि कुर्सियां भी फेंकी, कार पर पथराव किया। इतना ही नहीं बयान के विरोध में छात्रों ने डिग्रियां फाड़ना शुरू कर दिया और वहां रखे गमलों को तोड़ना शुरू कर दिया। क्रोधित छात्रों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। राज्यपाल के जाने के बाद छात्रों ने कुलपति आवास को निशाना बनाया। पथराव के साथ ही अंदर घुसकर तोड़फोड़ भी की। राज्यपाल का पुतला भी फूंका गया।

बवाल उस समय शुरू हुआ जब कुलाधिपति ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पहले से अंग्रेजी में तैयार नोट्स पढ़ने के बजाय हिन्दी में बोलना शुरू किया। उन्होंने कहा,जमाना बदल रहा है।

केवल संस्कृत में परास्नातक (पोस्ट ग्रेजुएट) आदि की डिग्री लेने से ही काम नहीं चलेगा। संस्कृत पढ़कर सिर्फ टीचर व पंडित तो बना जा सकता है लेकिन आईएएस बनने तथा दिल्ली व विलायत जाने के सपने को साकार नहीं किया जा सकता। इस डिग्री से छात्रों का भला होने वाला नहीं है। संस्कृत एक विषय (सब्जेक्ट) जरूर हो सकता है लेकिन दो से तीन लाख रुपये माह कमाने का यह जरिया नहीं हो सकता। राजेस्वर ने सवाल उठाया कि आखिर इस डिग्री से क्या फायदा हो सकता है?

इसके लिए छात्र अपनी सोच बदलें और अंग्रेजी अनिवार्य रूप से पढ़ें। कुलाधिपति ने कहा,संस्कृत विश्वविद्यालय में भी अंग्रेजी की अनिवार्य रूप से पढ़ाई हो, इसके लिए विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन किया जायेगा। सिर्फ संस्कृत भाषा के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा, जिस तरह से यूरोप में लैटिन व ग्रीक अब अनिवार्य नहीं है उसी तरह संस्कृत एक विषय तो हो सकती है लेकिन पूरी डिग्री नहीं बन सकती।

 

तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, तमिल की तरह संस्कृत भी परंपरागत भाषा है।

 कुलाधिपति का भाषण खत्म होते ही पूरे पंडाल में आक्रोश का ज्वार उबल पड़ा और नारेबाजी शुरू हो गयी। इससे परंपरागत शिष्ट यात्रा की वापसी भी नहीं हो सकी। भारी सुरक्षा के बीच राज्यपाल को समारोह स्थल से बाहर निकालते वक्त उनकी ओर न केवल जूता-चप्पल अपितु कुर्सियां उछाली जाने लगीं। हालांकि कुलाधिपति बाल-बाल बच गये लेकिन उनकी कार पर भी पथराव हुआ।

बाद में पुलिस ने छात्रों को दूर तक खदेड़ा और लाठियाया। इस बीच आक्रोश से भरे छात्रों ने अपना गोल्ड मेडल व उपाधियां हवा में उछालीं तो कुछ ने उपाधियां फाड़कर फेंक दी। इतना ही नहीं मंच पर लगा माइक तथा वहां रखे गमले तोड़ने तथा मोटरसाइकिलें क्षतिग्रस्त करने के साथ ही परिसर के पूर्वी गेट पर कुलाधिपति का प्रतीक पुतला भी फूंका गया।

दैनिक जागरण इलाहाबाद संस्करण से।

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