सूर्योदय के साथ-साथ 28/04/2007 की सुबह हमने नापोली मे प्रवेश किया|
मेरो मन अनत कहाँ सुख पावै।
जैसे उड़ि जहाज का पंक्षी (ऊपर की तस्वीर मे), फिरि जहाज पर आवै।
- सूरदास
ऊपर एक भवन से परावर्तित होतीँ सूर्य की किरणेँ.

और नीचे ‘बन्दरगाह’ पर एक दूर दृष्टि.
इस यात्रा का विस्तृत विवरण शीघ्र ही मेरे हिन्दी ब्लाग पर उपलब्ध होगा.



